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सुश्री सविता सोहाने ने बचपन से ही मेधावी छात्रा के रूप में स्कूल, काॅलेज में अपना एक अलग स्थान बनाया एवं षिक्षकों के दिमाग पर अमिट छाप छोड़ी। आपकी षिक्षा पिता के सेवा में होने के कारण ग्वालियर से आरंभ कर जबलपुर, रायपुर, से स्नातक सागर महाविधालय, एवं स्नात्कोत्तर हरिसिंह गौर विष्वविधालय से पूर्ण किया। आपने षिक्षा के साथ साथ नेषनल के्रडिट कोर (एनसीसी) का सी सर्टिफिकेट प्राप्त किया। आपकी रूचि किषोर अवस्था से ही लेखन क्षेत्र में रही है। विषेषकर कविता लेखन के क्षेत्र में विषेष रूझान परिलक्षित हुआ। खेलों के प्रति भी आपका विषेष रूझान बचपन से आजतक बना हुआ है बॉलीबॉल और कबड्डी, बैडमिंटन आपके मुख्य खेल रहे हैं। आप स्कूली एवं उच्च षिक्षा प्राप्त करने के साथ-साथ पाककला, चित्रकला, सिलाई, कढ़ाई, फल संरक्षण, गृह-सज्जा, में भी पारंगत है।
आप वर्तमान मे उप पुलिस महानिरीक्षक के पद पर पदस्थ होकर भारतीय पुलिस सेवा की वरिष्ठ अधिकारी है आपका चयन वर्ष 1994 में उप पुलिस अधीक्षक के पद पर मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग से हुआ व वर्ष 2009 में भारतीय पुलिस सेवा में पदोन्नति मिली आपके द्वारा अपनी सेवाए ग्वालियर से शुरु होकर नरसिंहपुर ,दमोह, विदिशा, उमरिया, सिवनी, मण्डला, सागर, पन्ना, आगर, दतिया, टीकमगढ़, उज्जैन में दी जा चुकी हैं। उल्लेखनीय है की आप उप पुलिस अधीक्षक के पद पर नियुक्त होने वाली गहोई समाज एवं बुंदेलखंड महिला वर्ग की प्रथम अधिकारी हैै। पुलिस सेवा मे आने से पूर्व आपके द्वारा अपनी सेवाए शैक्षणिक क्षेत्र में लगभग 04 वर्ष तक व्याख्याता (इतिहास) के रूप में एवं महिला एवं बाल विकास में अपनी सेवाए दे चुकी हैं महिला बाल विकास में सेवारत रहते हुए आपके द्वारा 20 अगस्त 1989 में महिला एवं बाल विकास मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व ऑल इंडिया लेबल पर दिल्ली मे किया गया जिसमें आपके वक्तव्य से मध्यप्रदेष को प्रथम स्थान दिलवाया जिस हेतु आपको तत्कालीन भारत के प्रधानमंत्री द्वारा पुरस्कृत किया गया इसके साथ ही आप महिला, बच्चों की षिक्षा एवं निराश्रत दिव्यांगो के प्रति बेहद संवेदनशील एवं उनके उत्थान के लिए सतत प्रत्यनशील रहती है।
सामाजिक एवं प्रशासनिक क्षेत्रों में आप अपने कार्यों के लिए लगातार जानी पहचानी जाती है वर्ष 2010 में ‘‘भावनाओं का दर्पण‘‘ प्रथम पुस्तक प्रकाशित हुई अभी तक आपकी ‘‘अनुभूतियों‘‘ (2012) ‘‘इंद्रधनुष‘‘ (2014) , के साथ-साथ आपकी माताजी श्रीमति उषा सोहाने के द्वारा संकलित भजनो की श्रृंखला को माला में पिरोकर ‘‘मातृका‘‘ के रूप मे आम जनता के लिए प्रकाशित किया गया।
पुलिस सेवाओं के दौरान सिंहस्थ 2016 में उत्कृष्ट कार्य करने एवं 2021 में कोरोना वायरस के दौरान विशेष सेवाएं देने हेतु उत्कृष्ट कार्य हेतु प्रशासनिक स्तर पर आपको उत्कृष्ट पदकों से नवाजा गया। वर्ष 1986 में पिता श्री शंकर लाल सोहाने एवं अगस्त 2021 में माताश्री श्रीमती ऊषा सोहाने का साथ छूटने के उपरान्त अपनी बहनों एवं बहनोई के अप्रतिम सहयोग के संकुल को ऊषांकर चैरिटेबल एंड एजुकेशनल ट्रस्ट का गठन कर सामाजिक एवं शैक्षणिक क्षेत्र मे सेवा समर्पण हेतु उतारा गया 10 अप्रैल 2022 से आपका ट्रस्ट जिसका कार्य क्षेत्र संपूर्ण भारत रखा गया हैं अपने आरंभिक वर्ष में मध्य प्रदेश के कई जिलों मे ट्रस्ट आपके नेतृत्व में सामाजिक सेवाएं दे रहा है।